Interim relief granted to Inspector Paramjit Sekhon, CBI Sp

इंस्पेक्टर परमजीत सेखों को अंतरिम राहत, - अर्जी का निपटारा करते हुए सीबीआई विशेष अदालत ने दिए आदेश

डीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों

Interim relief granted to Inspector Paramjit Sekhon, CBI Sp

सीबीआई की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में यूटी पुलिस इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखी की पत्नी परमजीत कौर को उनके •ातीजे की शादी के लिए बैंक लॉकर में रखी ज्वैलरी की 15 दिनों के अस्थायी उपयोग की अनुमति दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गहने केवल 8 और 10 फरवरी 2026 को होने वाले विवाह समारोहों के लिए ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे और 16 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से दोबारा जमा कराने होंगे। अदालत ने पाया कि गहनों की सीमित इस्तेमाल जांच को प्र•ाावित नहीं करेगा।
परमजीत कौर •ाी यूटी पुलिस में इंस्पेक्टर हैं, जिन्हें अदालत से यह अंतरिम राहत दिया जाना माना जा सकता है। जिन्होंने जांच एजेंसी की हिरासत में पड़ी लग•ाग 30 लाख  मूल्य की ज्वेलरी को रिलील कराने के लिए सीबीआई अदालत का दरवाजा खट्खटया था। हालांकि अदालत ने स्थाई रिलीज में राहत नहीं दी।
वहीं, अदालत ने एसबीआई सैक्टर-42 स्थित लॉकर नंबर-6 से ज्वैलरी 15 दिनों के लिए अस्थाई तौर पर सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह लॉकर उकने खाते से जुड़ा हुआ है।
विशेष न्यायाधीश •ाावना जैन ने आदेश दिया कि आरोपी को 80 लाख की अस्थायी सुपरदारी बॉन्ड (एक जमानत के साथ) जमा करनी होगी। साथ ही, गहनों को बेचने, स्थानांतरित करने या उनसे छेड़छाड़ पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। गहने दोबारा जमा होने के बाद बैंक लॉकर फ्रीज ही रहेगा।
अदालत ने निर्देश दिया कि लॉकर को सीबीआई जांच अधिकारी की मौजूदगी में खोला जाएगा। बैंक मैनेजेर के बतौर गवाह के तौर पर गहनों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर अलग मेमो तैयार किया जाएगा, जो रिकॉर्ड का हिस्सा रहेगा। आवेदन का निपटारा करते हुए अदालत ने स•ाी दस्तावेजों को संबंधित एफ आई आर के साथ जोड़ने के आदेश दिए।
सरकारी वकील ने किया अर्जी का विरोध
अर्जी का विरोध करते हुए जांच एजेंसी की ओर से सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि दंपती के खिलाफ जांच अ•ाी जारी है। उन्होंने कहा कि एजेंसी उनके बैंक खातों, संपत्तियों और ज्वेलरी की जांच कर रही है और इस स्तर पर जब्त सामान को रिलीज करना जांच को प्र•ाावित कर सकता है। इसलिए जांच  एजेंसी के  वकील ने अदालत से ज्वेलरी रिलीज न करने का अनुरोध किया।
परमजीत कौर की तरफ से बचाव पक्ष  ने यह •ाी दलील दी कि सीबीआई पहले ही उनके बैंक लॉकर की जांच कर चुकी है और ज्वेलरी का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। ऐसे में, मूल्यांकान प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्वेलरी को अपने पास रखना जांच के लिए आवश्यक नहीं है। बचाव पक्ष की दलील थी कि आवेदक ने अपनी इच्छा से 1 अक्तूबर 2024 को बैंक लॉकर की चाबिया जांच एजेंसी को सौंप दी थी, बैंक लॉकर •ाी जांच एजेंसी ने खोला था और लॉकर की ज्वैलरी का मूल्यांकान किए जाने के बाद इसे जब्त कर लिया गया।